Showing posts with label आरती. Show all posts
Showing posts with label आरती. Show all posts

किस वार को हुआ जन्म जानिए स्वभाव और भविष्य

सप्ताह के सातों दिन के कारक ग्रह अलग-अलग बताए गए हैं। रविवार का कारक ग्रह सूर्य (Sun) है, सोमवार का कारक ग्रह चंद्र (Moon) है, मंगलवार का मंगल (Mars), बुधवार का बुध (Mercury), गुरुवार का गुरु (Jupiter), शुक्रवार का शुक्र (Venus) और शनिवार का कारक ग्रह शनि (Saturn) है। ज्योतिष के अनुसार व्यक्ति का जन्म जिस वार को होता है, उस वार के कारक ग्रह का प्रभाव भी जीवनभर बना रहता है। जन्म वार के कारक ग्रह का असर स्वभाव पर भी होता है। यहां जानिए जन्म वार के अनुसार व्यक्ति के स्वभाव और भविष्य से जुड़ी कुछ बातें...


जिन लोगों का जन्म रविवार के दिन हुआ है, वे सामान्यत: भाग्यशाली रहते हैं। इनकी आयु भी अधिक रहती है। कम बोलने वाले ये लोग कला और शिक्षा के क्षेत्र में मान-सम्मान प्राप्त करते हैं। साथ ही, ये लोग धर्म में रुचि रखते हैं। घर-परिवार के सदस्यों को खुश रखने का प्रयास करते हैं। सामान्यत: ये लोग 20 से 22 वर्ष की आयु तक कष्ट झेलते हैं।
- जिस स्त्री का जन्म किसी भी माह के रविवार को हुआ है, वह दान-पुण्य करने वाली, बलशाली, शीत प्रवृत्ति वाली, चतुर और क्लेश करने वाली होती है। ऐसी स्त्रियां स्वभाव से धार्मिक भी होती हैं।

सोमवार को जन्म लेने वाले व्यक्ति हंसमुख और मीठा बोलने वाले होते हैं। सुख-दुख में सम भाव रखते हैं। विद्वान, कला कुशल और बहादुर होते हैं। ये लोग कफ संबंधी रोगों से परेशान रहते हैं। बीमारियों के कारण कमजोरी बनी रहती है। इन लोगों के लिए 9, 12, 27 वर्ष की आयु में कुछ परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं। सामान्यत: इनका जीवन ऐश और आराम से व्यतित होता है।
- सोमवार को जन्म लेने वाली स्त्री सामान्यत: दिखने में सुंदर होती है। ऐसी स्त्रियां शुद्ध बुद्धि वाली, मीठा बोलने वाली, शांति प्रिय, राजयोग वाली और पुत्रवान होती है। इनका जीवन सुख-समृद्धि के साथ व्यतीत होता है।
नोट- यहां वार के अनुसार बताया गया स्वभाव वार और उससे संबंधित ग्रह के आधार पर बताया गया है। कुंडली की अन्य ग्रह स्थिति के अनुसार यहां बताए गए स्वभाव में बदलाव भी हो सकता है। व्यक्ति के स्वभाव पर सभी ग्रह-नक्षत्रों का भी सीधा प्रभाव पड़ता है। अत: वार के अनुसार बताए गए स्वभाव में भिन्नता भी हो सकती है।

जिन लोगों का जन्म मंगलवार के दिन हुआ है, वे धनी होते हैं। सामान्यत: इन लोगों का स्वभाव उग्र होता है, इसी कारण ये लोग अपने आसपास रहने वाले कई लोगों से नाराज रहते हैं। इन्हें रक्त और स्कीन से संबंधित रोग हो सकते हैं। इनके जीवन में सुख-दुख और परेशानियां आती-जाती रहती हैं।
- ज्योतिष के अनुसार मंगलवार को जन्म लेने वाली स्त्री कठोर हृदय वाली हो सकती है। ऐसी स्त्रियां आसानी से किसी पर दया नहीं करती और दोषी को कठोरता से दण्ड भी देती हैं। इस दिन जन्म लेने वाली कुछ स्त्रियां झगड़ालू स्वभाव की भी हो सकती हैं। शरीर से दुबली-पतली लेकिन शक्तिशाली होती है।

बुधवार के दिन जन्म लेने वाले लोग सामान्यत: धर्म-कर्म में ध्यान लगाने वाले होते हैं। ये बुद्धिमान और मधुर भाषी होते हैं। विद्वान और धार्मिक जीवन जीने वाला इनका स्वभाव होता है। माता-पिता से विशेष प्रेम रखते हैं। 8 और 22 वर्ष की आयु में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
- बुधवार को जन्म लेने वाली स्त्री शिक्षा के क्षेत्र में विशेष उपलब्धि हासिल करने वाली होती हैं, क्योंकि इन्हें सरस्वती माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है। ये स्त्रियां सामान्यत: दिखने में सुंदर और स्वभाव से कोमल होती हैं। इस दिन जन्म लेने वाली स्त्रियां सदगुणी, कई कलाओं में कुशल होती हैं।

जिन लोगों का जन्म गुरुवार के दिन हुआ है, वे बुद्धिमान होते हैं और पराक्रमी होते हैं। ये लोग किसी भी मुश्किल समय का सामना बड़ी ही समझदारी और साहस के साथ करते हैं। इन लोगों के मित्र अच्छी संगती वाले होते हैं। मित्रों की ओर से सदैव प्रसन्न रहते हैं। इन्हें 7, 12, 13, 16 और 30 वर्ष की आयु में संकट का सामना करना पड़ सकता है।
- जिन महिलाओं या लड़कियों का जन्म गुरुवार को हुआ है, वे उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाली और सभी गुणों में श्रेष्ठ होती हैं। इन्हें धन-संपत्ति का सुख प्राप्त होता है। सामान्यत: ये स्त्रियां शांति प्रिय, धैर्यवान, पुत्रवान और सभी सुखों को प्राप्त करने वाली होती हैं।

शुक्रवार का दिन व्यक्ति को हंसमुख स्वभाव देता है। ये लोग बुद्धिमान और मधुरभाषी होते हैं। सहनशीलता के कारण कठिन समय का सामना भी अच्छे से कर लेते हैं। ऐश्वर्यपूर्ण जीवन इन लोगों को काफी पसंद होता है। कला के क्षेत्र में ये लोग खास मुकाम हासिल करते हैं। 20 और 24 वर्ष की आयु में इन्हें कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
- यदि किसी स्त्री का जन्म शुक्रवार को हुआ है तो वह स्वभाव से चंचल होती है। ऐसी स्त्रियां मजाक-मस्ती करना विशेष रूप से पसंद करती हैं। घर-परिवार तथा समाज में इनका एक अलग स्थान होता है। इस दिन जन्म लेने वाली स्त्री सुंदर विचारों वाली और सौभाग्यशाली होती हैं। ये श्याम या काले वर्ण की हो सकती हैं यानी इनका रूप-रंग सांवला हो सकता है।

जिन लोगों का जन्म शनिवार के दिन हुआ है, वे कृषि या व्यापार या तकनीकी क्षेत्र में विशेष रुचि रखते हैं। इन्हें छोटी आयु में कुछ परेशानियां हो सकती हैं। इन लोगों को मित्रता में सावधान रहने की आवश्यकता होती है। माता-पिता, भाई-बहनों की ओर से पूर्ण सुख प्राप्त नहीं हो पाता है। इन लोगों को 20, 25 और 45 वर्ष की आयु में कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
- शनिदेव के वार शनिवार को जन्म लेने वाली स्त्री शरीर से दुबली-पतली होती हैं और कद इनका लंबा होता है। सामान्यत: इस दिन जन्म लेने वाली स्त्रियां काले रंग वाली या सांवले रंग वाली होती हैं। कभी-कभी ये महिलाएं दूसरों की चुगली भी कर सकती हैं।

गरुड़ पुराण - जन्म और मृत्यु एक ऐसा चक्र

जन्म और मृत्यु एक ऐसा चक्र है जो अनवरत चलता रहता है। जिस व्यक्ति ने जन्म लिया है, वह एक दिन मृत्यु को अवश्य ही प्राप्त होगा। जन्म से मृत्यु तक हमें कई कार्य करने होते हैं। इन कार्यों के संबंध में ऋषि-मुनियों और विद्वानों द्वारा कई परंपराएं बनाई गई हैं, जिनका पालन करना काफी हद तक अनिवार्य भी माना गया है। जीवन के साथ-साथ मृत्यु के बाद की भी कुछ परंपराएं हैं, जिनका पालन मृत व्यक्ति के परिवार वालों को करना होता है। इन्हीं परंपराओं में से एक है, घर के किसी सदस्य की मृत्यु के बाद गरुड़ पुराण सुनना। किसी पंडित द्वारा गरुड़ पुराण पढ़वाई जाती है और घर के सभी सदस्य इसका श्रवण करते हैं।




गरुड़ पुराण के संबंध में शास्त्रों की मान्यता:-

ऐसी मान्यता है कि गरुड़ पुराण के श्रवण से मरने वाले व्यक्ति की आत्मा को भी शांति मिलती है, क्योंकि गरुड़ पुराण पगड़ी आदि रस्मों तक लगभग 12-13 दिनों तक पढ़ी जाती है। शास्त्रों के अनुसार पगड़ी रस्म तक मरने वाले की आत्मा उसी के घर में निवास करती है और वह भी यह पुराण सुनती है। गरुड़ पुराण श्रवण का धार्मिक महत्व यही है कि मृत व्यक्ति की आत्मा को शांति मिले और उसे मोक्ष मिल सके।


जन्म और मृत्यु से जुड़े सभी सवालों के जवाब हैं गरुड़ पुराण में:-

 परिवार के किसी भी सदस्य की मृत्यु के बाद घर में गरुड़ पुराण सुनने की प्राचीन परंपरा है। आज भी कई लोग इस परंपरा का पालन करते हैं। आमतौर पर लोगों के मन में जन्म और मृत्यु से जुड़े कई प्रश्नों के उत्तर जानने की उत्सुकता रहती है। जब किसी इंसान की मृत्यु होती है तो परिवार के शेष सदस्य यही सोचते हैं कि मृत्यु क्यों होती है? गरुड़ पुराण में जन्म-मृत्यु से जुड़े इन सभी सवालों के जवाब बताए गए हैं।

 गरुड़ पुराण का ज्ञान समझने पर मिलती है प्रेरणा:-

 गरुड़ पुराण में बताए गए रहस्यों को समझने के बाद मृत व्यक्ति के परिजनों को दुख सहने की शक्ति प्राप्त होती है और वे जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होते हैं। इस पुराण का ज्ञान यही प्रेरणा देता है कि हमें जीवन में अच्छे कार्य ही करना चाहिए। सभी जानते हैं कि जो जैसा कर्म करता है, उसे वैसा ही फल मिलता है। यही बातें गरुड़ पुराण में बताई गई है।


  हमें मिलता है हर अच्छे-बुरे कर्म का फल :-

 गरुड़ पुराण के अनुसार कर्मों का फल व्यक्ति को उसके जीवन में तो मिलता ही है, साथ ही मरने के बाद भी कर्मों का अच्छा-बुरा फल आत्मा को भोगना पड़ता है। इस ज्ञान को प्राप्त करने के लिए किसी की मृत्यु के बाद का अवसर निर्धारित किया गया ताकि उस समय हम जन्म-मृत्यु से जुड़े सभी सत्य जान सके और मृत व्यक्ति के बिछड़ने के दुख को सहन करने की शक्ति प्राप्त कर सके।

  गरुड़ पुराण का परिचय:-

गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु की भक्ति और उपासना का महत्व बताया गया है। इसमें श्रीहरि के 24 अवतारों की कथाओं का उल्लेख है। गरुड़ पुराण का प्रारंभ मनु और सृष्टि की उत्पत्ति से होता है। इसके बाद अन्य पौराणिक कथाएं भी हैं। सूर्य़ चन्द्र आदि ग्रहों के मंत्र, शिव-पार्वती पूजन का महत्व, इन्द्र, सरस्वती और नौ शक्तियों की भी जानकारियां इस पुराण में दी गई हैं। मूल गरुड़ पुराण को दो भागों में देखा जाता है। प्रथम भाग में श्रीहरि की भक्ति और उपासना का महत्व बताया गया है। दूसरे भाग में जन्म-मृत्यु के रहस्यों को बताया गया है। अलग-अलग नरकों का उल्लेख है। मृत्यु के बाद आत्मा का क्या होता है, उसका किस प्रकार की दूसरी योनियों में जन्म होता है, श्राद्ध और पितृ कर्म का महत्व बताया गया है।

शानि देव आरती




जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।
सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥ जय.॥


        श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी।

        नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥ जय.॥


क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी।

मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥ जय.॥


       मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी।
       लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥ जय.॥

देव दनुज ऋषि मुनि सुमरिन नर नारी।
विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी ॥जय.॥ 






Ayra Putra
Add caption

याद रखें यह 5 वास्तु मंत्र, हर संकट का होगा अंत

* वास्तु के अनुसार घर में पेड़-पौधे लगाने पर वे मानसिक शांति देते हैं। ये ध्वनि और विकिरणों को भी ग्रहण कर लेते हैं। ऐसा ही एक पौधा है मनी...